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आम बोलचाल में इस बीमारी को दिमाग का कीड़ा बोलते हैं, लेकिन वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤•ता यह है कि यह दिमाग में कीड़ा नहीं, कीड़े के अंडे हैं। जो पेट से होते हà¥à¤ दिमाग में चले जाते हैं। à¤à¤• बार यह बीमारी यदि हो जाठतो लंबा इलाज कराना पड़ता है। उचित जानकारी के अà¤à¤¾à¤µ में कई बार लोग नीम हकीमों या à¤à¤¾à¤¡à¤«à¤¼à¥‚ंक करने वालों के चकà¥à¤•र में पड़ जाते हैं। à¤à¤¸à¥‡ करता है अटैक à¤à¤• बार अंडा पेट में गया तो वहां आंत के रासà¥à¤¤à¥‡ खून के माधà¥à¤¯à¤® से दिमाग में चले जाते हैं और समसà¥à¤¯à¤¾ शà¥à¤°à¥‚ हो जाती है। इससे सिरदरà¥à¤¦ व मिरà¥à¤—ी के दौरे आ सकते हैं। इसके अतिरिकà¥à¤¤ उलà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ लगना, तेज चकà¥à¤•र आना, बेहोशी के अटैक, दौरे पड़ना, शरीर के à¤à¤• अंग में (हाथ, पैर) तेजी से कंपन होना। जैसी समसà¥à¤¯à¤¾ आम हो जाती है। इसलिठहो जाती है बीमारी वासà¥à¤¤à¤µ में यह बीमारी कचà¥à¤šà¤¾ अधपका मांस खाने वालों को होती है, देखने में आ रहा है कि यह बीमारी अब वेजिटेरियन लोगों को à¤à¥€ हो रही है। इस बीमारी को मेडिकल की à¤à¤¾à¤·à¤¾ में नà¥à¤¯à¥‚रोसिसà¥à¤Ÿà¥€à¤¸à¤°à¤•ोसिस कहते हैं। मनोचिकितà¥à¤¸à¤• डा. दिवà¥à¤¯ मंगला के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° जांच में सामने आया है कि कचà¥à¤šà¥€ सबà¥à¤œà¥€ इस कीड़े की वाहक बन रही है। इसकी वजह यह है कि कà¥à¤› तो सबà¥à¤œà¥€ की खेती में गंदा व पà¥à¤°à¤¦à¥‚षित पानी पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करते हैं। इससे यह बीमारी सबà¥à¤œà¥€ में आ जाती है। बीमारी फैलने की दूसरी वजह सूअर का अधपका मांस है। इस मांस को खाने वाले की आंत में फीता कृमि नामक कीड़ा जनà¥à¤® ले लेता है। संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की शौच के जरिठउसके अंडे बाहर आते हैं। जो दूर-दूर तक पानी व मिटà¥à¤Ÿà¥€ में फैल जाते हैं, जिससे अंडे सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में पहà¥à¤‚च जाते हैं। कचà¥à¤šà¥€ सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ से बचने का तरीका आसान कचà¥à¤šà¥€ सबà¥à¤œà¥€ (गाजर, मूली, पतà¥à¤¤à¤¾ गोà¤à¥€, शलगम, शकरकंदी, आलू समेत जो à¤à¥€ सबà¥à¤œà¥€ जमीन के अंदर है) को साफ पानी में धोना चाहिà¤à¥¤ ढाबों व होटल के सà¥à¤²à¤¾à¤¦ को खाने से बचें। रेहड़ियों पर बिकने वाले खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ के सेवन से बचें। चाउमिन का सेवन अधिक खतरनाक है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह पतà¥à¤¤à¤¾ गोà¤à¥€ से तैयार होती है। साफ-सफाई का विशेष धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें। सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में दूषित पानी की सपà¥à¤²à¤¾à¤ˆ à¤à¥€ नहीं करनी चाहिà¤à¥¤ विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• कचà¥à¤šà¥€ सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को पानी में दो या तीन बार धोकर ही तैयार करें।
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